कल मैंने आपसे मार्च 2016 के घटनाक्रम से सक्रिय रूप से संबद्ध एक संस्था #ब्यूरोक्रेसी की स्थिति पर कुछ बातें कही थी। मार्च 2016 में घटित घटनाक्रम में कई संस्थाओं ने सकारात्मक या नकारात्मक अपनी भूमिका अदा की, इनमें माननीय स्पीकर, माननीय गवर्नर, माननीय राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, माननीय न्याय पालिका, राजनीतिक दल के रूप में भाजपा व कांग्रेस, अन्य विपक्षी दल, मीडिया, कहीं न कहीं जुड़े हुये हैं। एक प्रसंग का दूसरे प्रसंग से जुड़ाव बनता है और 2016 के घटित घटनाक्रम को समूचे रूप में समझने के लिए इन संस्थाओं द्वारा अदा की गई भूमिका का ब्यौरा रखना भी मेरा कर्तव्य है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने किन-किन मामलों में न्यायिक विवेचना हो सकती है! लोकसभा, विधानसभा, स्पीकर और गवर्नर रूपी संस्था के किन-किन कदमों की न्यायिक विवेचना हो सकती है और कौन-कौन से कदम न्यायिक विवेचना से परे हैं के संदर्भ में स्पष्ट व्याख्या की है। उत्तराखंड की विधानसभा में स्पीकर महोदय ने उस कठिन क्षण में जिस प्रकार से विधानसभा को संचालित किया उससे हमारी विधानसभा का गौरव बढ़ा और जो विधानसभा अध्यक्ष रूपी संस्था है वह और प्रभावी हुई। मैंने उस घटनाक्रम को आपके साथ साझा किया है। शक्तिमान की टांग तोड़ने के अपराध में एक-दो भाजपा के राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर सदन को नहीं चलने दिया गया, नारेबाजी से लेकर कागज के गुल्ले बनाकर के स्पीकर महोदय के ऊपर फेंके गए, जो पुस्तकें विधानसभा के पटल पर उपलब्ध थी उनको स्पीकर महोदय पर फेंका गया, माइक तोड़ करके उनको फैंकने का प्रयास किया गया, विधानसभा सचिव और उनके सहयोगियों की टेबल विधानसभा का अभिन्न अंग होती हैं उस टेबल को उलट दिया गया और कुछ टेबलों पर चढ़कर के स्पीकर महोदय तक पहुंचने की कुचेष्टा की गई। स्पीकर महोदय ने शांत भाव से सब चीजों को झेला। मेरे सुझाव कि ऐसे विधायकों को कुछ दिनों के लिए विधानसभा से निलंबित किया जा सकता है! माननीय स्पीकर और संसदीय कार्य मंत्री ने कहा हमें कोई ऐसी नई शुरुआत अपनी विधानसभा में नहीं करनी चाहिए, ऐसा करेंगे तो कटुता और बढ़ेगी। जिस दिन दल-बदल हुआ, उस दिन जो कुछ भी विधानसभा की प्रक्रिया के संचालन और नियमावली में कहा गया है और संविधान द्वारा विधानसभा के संचालन के संदर्भ में जो कुछ कहा गया है उसके अनुरूप ही माननीय विधानसभा अध्यक्ष जी ने विनियोग विधेयक को पारित घोषित किया और सदन को 27 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया। क्योंकि पहले से ही बजट सत्र 28 मार्च तक के लिए आहूत किया गया था। माननीय स्पीकर महोदय के इस निर्णय को माननीय न्यायालय ने भी पूर्णतः उचित और सम्यक बताया।
मैंने अपनी पहले की पोस्टों में कुछ जानकारियां आपके सम्मुख रखी हैं। हमने 18 मार्च को माननीय स्पीकर महोदय द्वारा सदन के स्थगन की घोषणा के तत्काल बाद ही उन सब साक्ष्यों को समेटना प्रारंभ कर दिया था जो साक्ष्य उज्याड़ू बल्दों को दल बदलू सिद्ध करने में सक्षम थे। हमारे रखे हुए साक्ष्य माननीय स्पीकर महोदय और उसके बाद माननीय हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किये गए और अकाट्य सिद्ध हुये। सदन के संचालन के नियमों से अवगत न होना भाजपा और दल-बदलूओं के लिए जहां सदन के पटल पर 18 मार्च, 2016 को उनकी कुयोजना के विफलता का कारण बना, वहीं उत्तेजना में माननीय गवर्नर को नेता प्रतिपक्ष के लैडर हैड में संयुक्त हस्ताक्षर युक्त पत्र देना एक ऐसा अकाट्य साक्ष्य सिद्ध हुआ जिससे यह पूर्णत: सिद्ध हो गया कि दल-बदल भाजपा ने करवाया है और दल-बदलू भाजपा के साथ हैं। कांग्रेस विधायक दल ने संसदीय कार्य मंत्री जी के माध्यम से माननीय विधानसभा अध्यक्ष को दल-बदलूओं को नामित कर उनकी सदस्यता रद्द करने का अनुरोध पत्र तत्काल सौंप दिया था और लिखित तथा विजुअल, दोनों प्रकार के साक्ष्य भी माननीय विधानसभा अध्यक्ष जी को सौंप दिये। आगे बढ़ते हुए घटनाक्रम के साथ हमारी भी बेचैनी बढ़ रही थी। स्पीकर महोदय ने हमारे प्रार्थना पत्र पर क्या कार्यवाही की है उस संदर्भ में हमें कोई जानकारी नहीं मिल रही थी। स्पीकर महोदय और विधानसभा के सचिव महोदय से हमारा कोई भी व्यक्ति संपर्क नहीं कर पा रहा था। भाजपा और दल-बदलू, माननीय न्यायालय में पहुंचे। माननीय न्यायालय ने भी उन्हें कोई राहत नहीं दी। दल-बदलूओं के सूत्रों के माध्यम से मालूम हुआ कि माननीय स्पीकर महोदय ने उनके हर संभावित पते पर उन्हें नोटिस भेजकर कहा है कि वह 25 मार्च तक अपना पक्ष प्रस्तुत करें ताकि दल-बदल विरोधी कानून के तहत स्पीकर महोदय को प्राप्त अधिकारों का वह निर्वहन कर सकें।

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