चकराता वन प्रभाग की कनासर रेंज में बड़े पैमाने पर देवदार के पेड़ों के अवैध कटान मामले में कई और अधिकारियों-कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है। विभिन्न स्तरों पर चल रही जांच अंतिम चरण पर है। वहीं, 17 मुकदमों में न्यायालय में सुनवाई चल रही है। वन विभाग का दावा है कि आरोपियों को सजा दिलाने के लिए न्यायालय में मजबूत पैरवी की जा रही है।
तत्कालीन सहायक वन संरक्षक मुकुल कुमार के नेतृत्व में अन्य वन प्रभागों के अधिकारी-कर्मचारी और पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम ने कई गांवों में लगातार एक सप्ताह से अधिक समय तक छापामारी की थी।
इस दौरान कनासर रेंज क्षेत्र के बिनसौन, मशक तथा रजाणू में देवदार के साढ़े चार हजार से अधिक अवैध स्लीपर मिले थे। लापरवाही पर आधा दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई थी। रेंज अधिकारी, वन दरोगा और वनरक्षकों आदि के खिलाफ निलंबन से वन विभाग में हड़कंप मच गया था। करीब एक वर्ष बाद विभिन्न स्तरों पर की जा रही विभागीय जांच पूरी होने वाली है। इसके बाद अवैध कटान के मामले में संलिप्त अन्य विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों पर भी गाज गिरनी तय मानी जा रही है।
डीएफओ चकराता अभिमन्यु ने बताया कि विभिन्न स्तरों पर चल रही कुछ विभागीय जांच पूर्ण हो गई हैं। कुछ में उच्च अधिकारियों की ओर से प्रभागीय स्तर से कुछ और जानकारी मांगी गई थी जो उपलब्ध करा दी गई है। मामले में दो दर्जन से अधिक आरोपियों पर 17 मुकदमे दर्ज किए गए थे। न्यायालय में सुनवाई चल रही है। विभाग अपनी ओर से मजबूत पैरवी कर रहा है।

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